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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर आयोजित, तंबाकू छोड़ने पर दिया गया जोर

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विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर आयोजित, तंबाकू छोड़ने पर दिया गया जोर

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उदयपुर, 31 मई: विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर प्रार्थना मानव सेवा संस्थान द्वारा आयोजित विशेष होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य तंबाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना तथा नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों को चिकित्सकीय एवं मानसिक सहयोग उपलब्ध कराना रहा।
शिविर का शुभारंभ वेंकटेश्वर इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस के प्रिंसिपल एवं वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक प्रोफेसर डॉ. अनन्त प्रकाश गुप्ता द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि तंबाकू सेवन—चाहे वह गुटखा, बीड़ी या सिगरेट के रूप में हो—शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है और यह धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि होम्योपैथी में ऐसी औषधियाँ उपलब्ध हैं जो तंबाकू की लत को कम करने में सहायक हो सकती हैं, खासकर जब उन्हें उचित परामर्श और जीवनशैली सुधार के साथ अपनाया जाए।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर सामाजिक दबाव या जिज्ञासा से होती है, लेकिन यह आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए समय रहते इससे दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
इस अवसर पर प्रार्थना मानव सेवा संस्थान के अध्यक्ष हेमंत चोपड़ा ने कहा कि तंबाकू निषेध दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज को नशामुक्त दिशा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं भी नशे से दूर रहें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें, ताकि एक स्वस्थ और जागरूक समाज का निर्माण हो सके।
संस्थान के सचिव विनय जैन ने बताया कि इस प्रकार के चिकित्सा शिविरों का मुख्य उद्देश्य लोगों को न केवल उपचार उपलब्ध कराना है, बल्कि उन्हें तंबाकू छोड़ने के लिए मानसिक रूप से भी तैयार करना है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें नियमित परामर्श, पारिवारिक सहयोग और चिकित्सकीय मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
डॉ. मानसी गुप्ता ने कहा कि तंबाकू की लत छोड़ने के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक बदलाव भी आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि सही दिनचर्या, तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और निरंतर चिकित्सा परामर्श के माध्यम से इस लत पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
शिविर में कुल 67 लोगों ने भाग लिया। इनमें से कई प्रतिभागियों ने अपनी स्वास्थ्य जांच करवाई और विशेषज्ञों से व्यक्तिगत परामर्श प्राप्त किया। चिकित्सकों ने प्रत्येक व्यक्ति को उनकी आदतों और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार मार्गदर्शन दिया तथा तंबाकू छोड़ने की दिशा में छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से तंबाकू मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया और यह संदेश दिया कि नशा मुक्त जीवन ही स्वस्थ और समृद्ध भविष्य की नींव है।

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