जुआरियों को सड़क पर ‘मुर्गा’ बनाना अमानवीय, कोर्ट ने मांगा जवाब
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उदयपुर एसपी को 7 दिन में स्पष्टीकरण लेने के निर्देश
उदयपुर, 19 मई : उदयपुर कोर्ट ने जुआ खेलने के आरोप में पकड़े गए आरोपियों को सड़क पर ‘मुर्गा’ बनाकर परेड कराने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे अमानवीय कृत्य बताया है। चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मनीष कुमार जोशी ने उदयपुर एसपी डॉ. अमृता दुहन को आदेश दिए हैं कि संबंधित पुलिस अधिकारियों से सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण लेकर कोर्ट को अवगत कराया जाए।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि आरोपियों की परेड और ‘मुर्गा’ बनाए जाने से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया से हटवाए जाएं। यह आदेश आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए।
दरअसल, 15 मई 2026 को पुलिस ने संगठित गिरोह बनाकर जुआ खेलने के आरोप में 16 लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 112(2) और राजस्थान जुआ अध्यादेश के तहत मामला दर्ज किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की सड़क पर परेड करवाई गई थी। अगले दिन उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
आरोपियों के अधिवक्ता अब्दुल अलीम खान ने बताया कि जमानत याचिका खारिज हो गई, लेकिन कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को गंभीर माना। अधिवक्ता के अनुसार डीएसपी सूर्यवीर सिंह राठौड़ और जब्ती अधिकारी जगदीश कुमार की मौजूदगी में यह परेड करवाई गई थी। अब कोर्ट ने पूरे मामले में जवाब तलब किया है।
