मेवाड़-वागड़ में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को लेकर उठ रहे सवाल
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निकाय चुनाव के हालिया घटनाक्रम के बाद राजनीतिक प्रतिनिधित्व और टिकट वितरण पर समाज के भीतर चर्चा तेज
उदयपुर, 19 सितम्बर: मेवाड़-वागड़ की राजनीति में चुनावी नतीजों के बाद अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संगठन तथा चुनावी राजनीति में हिस्सेदारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इसे किसी एक दल या पूरे समाज की एकरूप राय के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
उदयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के 53 पार्षद निर्वाचित होने के बाद मेयर पद को लेकर पार्टी में रायशुमारी हुई। इस दौरान दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर समेत कई नाम चर्चा में रहे। इससे पहले भाजपा की ओर से जारी 80 वार्डों की सूची में दिनेश भट्ट का नाम प्रत्याशियों में शामिल था।
डूंगरपुर नगर परिषद में भी सभापति पद को लेकर भाजपा के भीतर घटनाक्रम चर्चा में रहा। भाजपा ने सुशीला गुप्ता को अधिकृत प्रत्याशी बनाया, जबकि पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या ने भी दावेदारी की। बाद में प्रभु पंड्या ने सभापति पद से नाम वापस ले लिया और सुशीला गुप्ता की दावेदारी आगे बढ़ी।
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो उदयपुर क्षेत्र से भाजपा के ताराचंद जैन विधायक हैं। वहीं संभाग के आदिवासी बहुल हिस्से में कई विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। राजस्थान विधानसभा की आधिकारिक सूची में उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ क्षेत्र की कई सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दर्ज हैं। इन घटनाक्रमों ने टिकट वितरण, संगठन में प्रतिनिधित्व और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर बहस को जरूर जगह दी है। अब यह चर्चा किस रूप में आगे बढ़ती है, यह आने वाले संगठनात्मक और स्थानीय राजनीतिक निर्णयों से स्पष्ट होगा।

