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देश का ‘एनर्जी इंजन’ बना राजस्थान

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देश का ‘एनर्जी इंजन’ बना राजस्थान

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बिजली उत्पादन: सौर और गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
उदयपुर, 13 मई (संदीप कुमावत):
राजस्थान अब देश में गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य ने ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को “एनर्जी इंजन” के रूप में स्थापित किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्थान का गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन 6 हजार 912 करोड़ यूनिट के पार पहुंच गया है, जबकि सौर ऊर्जा उत्पादन 5 हजार 992 करोड़ यूनिट से अधिक दर्ज किया गया है।
राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियां और सालभर मिलने वाला प्रचुर सूर्य प्रकाश इसे सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए आदर्श राज्य बनाता है। यही वजह है कि राजस्थान ने “सोलर कैपिटल ऑफ इंडिया” के रूप में अपनी पहचान मजबूत की है। वर्ष 2024-25 में राज्य का सौर ऊर्जा उत्पादन 4 हजार 910 करोड़ यूनिट था, जो इस वर्ष तेजी से बढ़ा है।
राज्य सरकार द्वारा सोलर पार्क विस्तार, निजी निवेश को बढ़ावा और ट्रांसमिशन ढांचे को मजबूत करने जैसे कदमों से ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी राजस्थान को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वर्तमान में राज्य की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 41 हजार मेगावाट से अधिक हो चुकी है।
सौर ऊर्जा के साथ-साथ राजस्थान ने पवन, बायोमास और हाइड्रो ऊर्जा में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे क्षेत्रों में पवन ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। विगत दो वर्षों में पवन ऊर्जा से 1 हजार 428 करोड़ यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन हुआ है।
कुसुम योजना से किसानों को बड़ा लाभ
राजस्थान में प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 4 हजार 27 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इससे राज्य के करीब 2.62 लाख किसानों को दिन में कृषि बिजली उपलब्ध हो रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्थान को भविष्य में देश का प्रमुख ऊर्जा प्रदाता राज्य बनाना है।

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