₹2,000 तक की जांचें बिना मंजूरी होंगी, इससे अधिक पर लेना होगा प्री-ऑथराइजेशन; इमरजेंसी मामलों को मिली पूरी छूट
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RGHS में बड़ा बदलाव: OPD जांचों पर 13 जुलाई से लागू होंगे नए नियम
उदयपुर, 10 जुलाई (सुभाष शर्मा): राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) के लाखों लाभार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने ओपीडी (OPD) के तहत होने वाली रूटीन जांचों के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जो 13 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुव्यवस्थित बनाना है।
नई गाइडलाइन के अनुसार यदि चिकित्सक द्वारा लिखी गई रूटीन जांचों का कुल खर्च ₹2,000 तक है, तो लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की पूर्व मंजूरी (प्री-ऑथराइजेशन) की आवश्यकता नहीं होगी और वे सीधे जांच करवा सकेंगे। हालांकि, जांचों का कुल खर्च ₹2,000 से अधिक होने पर संबंधित अस्पताल को RGHS पोर्टल के माध्यम से प्री-ऑथराइजेशन लेना अनिवार्य होगा।
सरकार ने इमरजेंसी मरीजों को बड़ी राहत देते हुए ऐसे मामलों को प्री-ऑथराइजेशन की बाध्यता से बाहर रखा है। आपात स्थिति में डॉक्टर और अस्पताल तत्काल जांच शुरू कर सकेंगे, लेकिन उन्हें मरीज की स्थिति से जुड़े आवश्यक क्लिनिकल दस्तावेज RGHS पोर्टल पर अपलोड करने होंगे।
नई व्यवस्था के तहत अस्पताल द्वारा प्री-ऑथराइजेशन का अनुरोध भेजे जाने के बाद TPA को अर्जेंट जांचों पर एक घंटे और नॉन-अर्जेंट जांचों पर तीन घंटे के भीतर निर्णय देना होगा। यदि निर्धारित समय में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो संबंधित जांच को स्वतः मंजूर (ऑटो-अप्रूव्ड) माना जाएगा।
प्री-ऑथराइजेशन के लिए अस्पतालों को मरीज की ओपीडी पर्ची, मेडिकल हिस्ट्री, पुरानी जांच रिपोर्ट और जांच की आवश्यकता से जुड़े चिकित्सकीय कारण पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
क्या बदला?
- ₹2,000 तक की रूटीन जांचें सीधे करवाई जा सकेंगी।
- ₹2,000 से अधिक की जांचों पर प्री-ऑथराइजेशन जरूरी होगा।
- इमरजेंसी मामलों में पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
- अर्जेंट मामलों में 1 घंटे और सामान्य मामलों में 3 घंटे में फैसला देना होगा।
- समय सीमा में निर्णय नहीं होने पर जांच स्वतः मंजूर मानी जाएगी।
