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बीएन संस्थान में 26 करोड़ की एफडी और फर्जी नियुक्तियों पर बवाल

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बीएन संस्थान में 26 करोड़ की एफडी और फर्जी नियुक्तियों पर बवाल

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एडहॉक कमेटी ने पूर्व कार्यकारिणी पर लगाए गंभीर आरोप, परिवारवाद और वित्तीय अनियमितताओं को बताया भ्रष्टाचार की जड़
उदयपुर, 18 अप्रैल:
उदयपुर के प्रतिष्ठित भूपाल नोबल्स संस्थान में प्रशासनिक विवाद अब गंभीर आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गया है। प्रधान संरक्षक विश्वराज सिंह मेवाड़ की ओर से गठित एडहॉक कमेटी ने पूर्व कार्यकारिणी पर 26 करोड़ रुपए की एफडी में गड़बड़ी, फर्जी नियुक्तियां, परिवारवाद और ऑडिट प्रक्रिया रोकने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। कमेटी का कहना है कि वर्षों से संस्थान में एक ही गुट का नियंत्रण रहा, जिसने आर्थिक अनियमितताओं को छिपाने के लिए पारदर्शिता खत्म कर दी। आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद बीएन संस्थान का विवाद और गरमा गया है।
एडहॉक कमेटी के चेयरमैन डॉ. युवराज सिंह झाला ने कहा कि संस्थान में लंबे समय से भ्रष्टाचार को संरक्षण मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 और 2022 में जब निष्पक्ष ऑडिट कराने का प्रयास हुआ तो तत्कालीन पदाधिकारियों ने उसे रुकवा दिया। इतना ही नहीं, वर्ष 2025 में ऑडिट टीम को संस्थान के कार्यालय में प्रवेश तक नहीं करने दिया गया और जरूरी दस्तावेज देने से भी इनकार कर दिया गया। कमेटी का आरोप है कि यह सब वित्तीय गड़बड़ियों को छिपाने के लिए किया गया।
सबसे गंभीर आरोप 26 करोड़ रुपए की एफडी को लेकर लगाया गया है। कमेटी का दावा है कि यूजीसी नियमों की अनदेखी कर जाली हस्ताक्षरों से एफडी तुड़वाई गई और रकम निकाली गई। साथ ही चेकबुक पर ऐसे लोगों से हस्ताक्षर करवाए गए, जिनके पास कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। संस्थान की शिकारबाड़ी क्षेत्र स्थित करोड़ों की जमीन को लेकर भी निजी स्वार्थ साधने की साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा, रिश्तेदारों को फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरियां देने और अयोग्य व्यक्तियों को परीक्षा ड्यूटी में लगाने का आरोप भी लगाया गया है। एडहॉक कमेटी के सदस्य एडवोकेट नरेंद्र सिंह कच्छवा ने कहा कि करीब 800 योग्य आवेदकों को सदस्यता से वंचित कर पदाधिकारियों ने अपने परिवार के दो दर्जन लोगों को सदस्य बना दिया।
एडहॉक कमेटी का कहना है कि यह लड़ाई संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने की है। फिलहाल मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और अगली तारीख 5 मई तय की गई है। आरोपों ने बीएन संस्थान की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब सभी की नजर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी है।
विवाद के मुख्य आरोप
— 26 करोड़ की एफडी जाली हस्ताक्षरों से तुड़वाने का आरोप
— फर्जी मार्कशीट के आधार पर रिश्तेदारों को नौकरी देने के आरोप
— ऑडिट प्रक्रिया रोकने और दस्तावेज छिपाने का आरोप
— परिवारवाद के तहत अपात्र लोगों को सदस्य बनाने का मामला
— एसओजी जांच की मांग और मामला अदालत में विचाराधीन

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