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फूटा तालाब पर कार्रवाई क्यों नहीं? कांग्रेस ने उठाए प्रशासनिक संरक्षण के सवाल

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फूटा तालाब पर कार्रवाई क्यों नहीं? कांग्रेस ने उठाए प्रशासनिक संरक्षण के सवाल

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दो साल तक फाइलें गायब रहने और अवैध भराव पर जांच की मांग
उदयपुर, 18 जून:
हिरणमगरी सेक्टर-13 स्थित फूटा तालाब में कथित अवैध भराव, अतिक्रमण और भूमि स्वरूप परिवर्तन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। देहात जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव प्रदीप त्रिपाठी सहित कई कांग्रेस नेताओं ने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। नेताओं का आरोप है कि वर्षों से शिकायतों और राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितताओं के बावजूद प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है, जिससे भूमाफियाओं को संरक्षण मिलने की आशंका बढ़ रही है।
2023 की फाइलें दो साल तक रहीं गायब
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि तहसीलदार गिर्वा ने मार्च 2023 में राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 177 के तहत दो प्रकरण उपखंड अधिकारी (राजस्व न्यायालय) को भेजे थे। इनमें कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग और अतिक्रमण का उल्लेख करते हुए बेदखली की कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि वर्ष 2025 में यह तथ्य सामने आया कि मूल पत्रावलियां संबंधित कार्यालय में अप्राप्त रहीं और प्रकरणों को दोबारा तैयार कर भेजना पड़ा। नेताओं ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक जल निकाय से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले की फाइलें आखिर दो वर्षों तक कहां रहीं।
न्यायालय जाने की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार, यूडीए और राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद फूटा तालाब में अवैध भराव और निर्माण जारी है। उन्होंने लंबित प्रकरणों की स्थिति सार्वजनिक करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा सभी अवैध निर्माण हटाकर तालाब को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

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